इश्क जो कभी खत्म नहीं हुआ ❤️

इश्क जो कभी खत्म नहीं हुआ ❤️


उसकी शादी की खबर सुनकर मैंने मुस्कुराने की कोशिश की थीलेकिन उस रात मेरी आंखों ने पहली बार पूरी रात रोकर गुजारी थी।
सब कहते थे कि हमारी कहानी खत्म हो चुकी है, मगर उन्हें क्या पता था कि कुछ इश्क मौत से नहीं, वक्त से नहींबल्कि सिर्फ इंतजार से हारते हैं।

अध्याय 1: पहली मुलाकात

साल 2016...

लखनऊ यूनिवर्सिटी का पहला दिन था।

नए चेहरे, नई किताबें और नए सपनों के बीच आदित्य अपनी क्लास ढूंढ रहा था।

तभी किसी से टकराकर उसकी किताबें नीचे गिर गईं।

"सॉरी..."

एक मीठी सी आवाज उसके कानों में पड़ी।

जब उसने ऊपर देखा, तो सामने एक लड़की खड़ी थी।

सफेद सलवार-सूट...

लंबे बाल...

और आंखों में ऐसी मासूमियत कि आदित्य कुछ पल के लिए सब भूल गया।

उसका नाम था नैना।

शायद उसी पल एक नई कहानी शुरू हुई थी।

 

अध्याय 2: दोस्ती से मोहब्बत तक

पहले नोट्स शेयर हुए।

फिर कैंटीन में चाय।

फिर लाइब्रेरी में साथ पढ़ाई।

और देखते ही देखते दोनों एक-दूसरे की आदत बन गए।

कॉलेज में हर कोई जानता था कि अगर आदित्य कहीं होगा, तो नैना भी वहीं होगी।

लेकिन दोनों में से किसी ने कभी अपने प्यार का इज़हार नहीं किया।

शायद दोनों डरते थे...

रिश्ता बदल गया तो दोस्ती भी खो जाएगी।

 

अध्याय 3: बारिश वाली शाम

एक दिन तेज बारिश हो रही थी।

दोनों कॉलेज की छत पर खड़े शहर को देख रहे थे।

नैना ने अचानक पूछा

"अगर मैं कभी तुम्हारी जिंदगी से चली गई तो?"

आदित्य हंस पड़ा।

"फिल्में कम देखा करो।"

"सीरियस हूं मैं।"

"तो सुनो..."

आदित्य ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा

"तुम कहीं भी चली जाओ, मेरा दिल तुम्हारे पास ही रहेगा।"

नैना मुस्कुरा दी।

लेकिन उसकी आंखों में नमी थी।

 

अध्याय 4: अचानक आया तूफान

कॉलेज खत्म होने में सिर्फ तीन महीने बचे थे।

तभी नैना ने आदित्य को मिलने बुलाया।

वो पहले जैसी नहीं लग रही थी।

चेहरे पर उदासी थी।

"पापा ने मेरी शादी तय कर दी है।"

आदित्य को लगा जैसे किसी ने उसकी सांसें रोक दी हों।

कुछ पल दोनों चुप रहे।

फिर नैना रो पड़ी।

"काश हम पहले कह पाते कि हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं।"

उस दिन दोनों ने पहली बार अपने दिल की बात कही।

लेकिन शायद बहुत देर हो चुकी थी।

 

अध्याय 5: बिछड़ना

नैना की शादी हो गई।

आदित्य शादी में नहीं गया।

उसने खुद को काम में डुबो दिया।

दिल टूट चुका था।

लेकिन प्यार अभी भी जिंदा था।

हर जन्मदिन पर वह नैना के लिए एक खत लिखता।

लेकिन कभी भेजता नहीं।

वो सारे खत उसकी अलमारी में जमा होते गए।

 

अध्याय 6: सात साल बाद

सात साल गुजर गए।

आदित्य अब एक सफल लेखक बन चुका था।

उसकी किताबें लाखों लोग पढ़ते थे।

लेकिन उसकी हर कहानी में एक लड़की होती थी

नैना जैसी।

एक दिन उसकी नई किताब के लॉन्च इवेंट में भीड़ लगी हुई थी।

तभी पीछे बैठी एक महिला पर उसकी नजर पड़ी।

दिल की धड़कन रुक गई।

वो नैना थी।

 

अध्याय 7: Suspense Begins...

इवेंट खत्म होने के बाद नैना उसके सामने आई।

"कैसे हो?"

सात साल बाद भी वही मुस्कान।

वही आंखें।

लेकिन उनमें कहीं गहरा दर्द छुपा था।

दोनों पास के कैफे में बैठे।

आदित्य ने देखा कि नैना के हाथ में अब शादी की अंगूठी नहीं थी।

लेकिन उसने कुछ पूछा नहीं।

 

अध्याय 8: सबसे बड़ा सच

काफी देर की खामोशी के बाद नैना बोली

"तुम जानना नहीं चाहोगे कि मैं कहां थी इतने साल?"

आदित्य चुप रहा।

नैना की आंखें भर आईं।

"मेरी शादी कभी खुश नहीं रही।"

उसने बताया कि उसका पति अच्छा इंसान नहीं था।

वो रिश्ता सिर्फ परिवार की खुशी के लिए निभाती रही।

लेकिन दो साल पहले दोनों अलग हो गए।

तब से वह अकेली रह रही थी।

"मैंने कई बार तुम्हें ढूंढने की कोशिश की..."

"फिर मिली क्यों नहीं?"

नैना मुस्कुरा दी।

"डरती थी कि कहीं तुम मुझे भूल चुके हो।"

 

अध्याय 9: वो खत

आदित्य उसे अपने घर ले गया।

उसने अलमारी खोली।

और सात सालों से संभालकर रखे हुए सारे खत उसके सामने रख दिए।

नैना हैरान रह गई।

"ये क्या है?"

"हर साल तुम्हारे लिए लिखा एक खत।"

नैना के हाथ कांपने लगे।

वो पहला खत खोलकर पढ़ने लगी।

फिर दूसरा।

फिर तीसरा।

हर खत में वही प्यार था।

वही इंतजार।

वही दर्द।

आंसू उसके गालों पर बहने लगे।

 

अध्याय 10: इश्क जो कभी खत्म नहीं हुआ

उस रात दोनों शहर की उसी छत पर पहुंचे जहां कभी बारिश में खड़े होकर बातें किया करते थे।

आसमान में चांद चमक रहा था।

हवा धीरे-धीरे चल रही थी।

नैना ने पूछा

"तुमने दूसरी शादी क्यों नहीं की?"

आदित्य हंस पड़ा।

"क्योंकि दिल ने किसी और को जगह ही नहीं दी।"

नैना रोते हुए उसके गले लग गई।

सालों का इंतजार...

सालों की दूरी...

सालों का दर्द...

एक पल में बह गया।

 

Epilogue ❤️

एक साल बाद...

उसी कॉलेज में एक साहित्य समारोह आयोजित हुआ।

मुख्य अतिथि थे

लेखक आदित्य शर्मा।

लेकिन इस बार वो अकेले नहीं थे।

उनके साथ मंच पर नैना भी थी।

कार्यक्रम के अंत में एक छात्र ने पूछा

"सर, आपकी सबसे पसंदीदा प्रेम कहानी कौन सी है?"

आदित्य मुस्कुराया।

उसने नैना का हाथ थाम लिया।

और कहा

"वो कहानी जो कभी खत्म नहीं हुई... क्योंकि उसका इश्क कभी खत्म नहीं हुआ।"

पूरे हॉल में तालियां गूंज उठीं।

नैना की आंखों में खुशी के आंसू थे।

और इस बार...

किस्मत ने उनकी कहानी अधूरी नहीं छोड़ी।

क्योंकि कुछ मोहब्बतें वक्त से हारती नहीं...

वो बस सही समय का इंतजार करती हैं। ❤️✨


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