वो रात को चली गयी?
“उस रात उसने सिर्फ इतना कहा था — ‘अगर सुबह तक मैं वापस ना आऊं… तो मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना।’”
“लेकिन जब अगली सुबह उसके कमरे में खून के निशान मिले… तब मुझे एहसास हुआ कि मैं उसे हमेशा के लिए खो चुका हूं…”
मुंबई
की वो रात अजीब
तरह से खामोश थी।
बाहर तेज बारिश हो
रही थी। सड़क पर
सिर्फ स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी
चमक रही थी।
रात
के करीब 2 बजे थे।
आरव
बालकनी में खड़ा सिगरेट
पी रहा था, तभी
पीछे से किसी ने
उसे कसकर गले लगा
लिया।
वो मुस्कुराया।
“नींद
नहीं आ रही, मीरा?”
मीरा
ने धीरे से कहा—
“काश…
ये रात यहीं रुक
जाए।”
आरव
पलटा।
मीरा
की आंखें नम थीं।
लेकिन
उसके होंठों पर अजीब सी
मुस्कान थी… जैसे वो
कुछ छुपा रही हो।
उनकी
खूबसूरत दुनिया
आरव
और मीरा पिछले दो
साल से साथ थे।
दोनों
की मुलाकात एक छोटी सी
book café में हुई थी।
मीरा
को बारिश पसंद थी…
पुराने गाने पसंद थे…
और आरव की बेवकूफियां
भी।
धीरे-धीरे दोनों की
दुनिया बस एक-दूसरे
तक सीमित हो गई।
आरव
अक्सर कहता—
“अगर
तुम एक दिन भी
दूर चली गई ना…
मैं पागल हो जाऊंगा।”
मीरा
बस मुस्कुरा देती।
लेकिन
पिछले कुछ दिनों से
वो बदल गई थी।
रात-रात भर किसी
से फोन पर बात
करना…
बार-बार डरकर पीछे
देखना…
और अचानक चुप हो जाना…
आरव
महसूस कर रहा था
कि कुछ गलत है।
वो
आखिरी Kiss
उस रात बारिश बहुत
तेज थी।
मीरा
अचानक आरव के पास
आई और उसके चेहरे
को अपने हाथों में
पकड़ लिया।
“अगर
मैं चली जाऊं… तो
क्या तुम मुझे भूल
जाओगे?”
आरव
हंस पड़ा।
“तुम
फिल्में ज्यादा देखने लगी हो।”
लेकिन
मीरा नहीं हंसी।
उसने
धीरे से आरव को
Kiss किया…
शायद
पहले से ज्यादा गहराई
से।
फिर
उसकी आंखों में देखते हुए
बोली—
“I love you… शायद
जितना तुम सोच भी
नहीं सकते।”
उसके
बाद वो कमरे से
बाहर चली गई।
और फिर…
वो कभी वापस नहीं
आई।
अगली
सुबह
सुबह
दरवाजा खुला मिला।
कमरे
में सब कुछ बिखरा
हुआ था।
फर्श
पर टूटे हुए कांच
पड़े थे…
और दीवार के पास खून
की कुछ बूंदें।
आरव
का दिल जोर-जोर
से धड़कने लगा।
उसने
तुरंत पुलिस को कॉल किया।
लेकिन
पुलिस को कोई सबूत
नहीं मिला।
ना मीरा का फोन…
ना कोई message…
बस उसकी डायरी का
एक फटा हुआ पन्ना
मिला।
जिसमें
लिखा था—
“कुछ
लोग प्यार के लिए मर
जाते हैं… और कुछ
लोग प्यार को बचाने के
लिए गायब हो जाते
हैं।”
Suspense Begins…
अगले
कुछ दिनों तक आरव पूरी
तरह टूट चुका था।
लेकिन
तभी हर रात ठीक
2:15 बजे उसके फोन पर
unknown नंबर से कॉल आने
लगे।
दूसरी
तरफ सिर्फ बारिश की आवाज होती…
और किसी लड़की की
धीमी सांसें।
एक रात अचानक आवाज
आई—
“आरव…
मुझे ढूंढना मत…”
आरव
shock में था।
“मीरा?!
तुम कहां हो?!”
लेकिन
कॉल कट गया।
पुरानी
हवेली का राज
कुछ
दिनों बाद आरव को
एक courier मिला।
उसमें
एक पुरानी फोटो थी।
फोटो
में मीरा किसी अजनबी
आदमी के साथ खड़ी
थी।
फोटो
के पीछे लिखा था—
“अगर
सच जानना है… तो Royal Hill Haveli आओ।”
रात
के 12 बजे आरव उस
सुनसान हवेली में पहुंचा।
पूरा
माहौल डरावना था।
बारिश…
टूटी खिड़कियां…
और अंधेरे गलियारे…
तभी
ऊपर से पायल की
आवाज आई।
आरव
धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ने
लगा।
और फिर…
उसने
मीरा को देखा।
सफेद
कपड़ों में…
भीगी हुई…
आंखों में डर…
“मीरा!”
आरव उसकी तरफ भागा।
लेकिन
मीरा पीछे हट गई।
“पास
मत आना…”
सबसे
बड़ा सच
आरव
हैरान था।
“तुम
जिंदा हो… तो फिर
ये सब क्या है?!”
मीरा
रोने लगी।
“मैंने
तुमसे झूठ बोला था…”
उसने
बताया कि उसका असली
नाम मीरा नहीं, मायरा
था।
और वो एक powerful businessman के खिलाफ गवाही
देने वाली witness थी।
कुछ
खतरनाक लोग महीनों से
उसका पीछा कर रहे
थे।
“जिस
रात मैं गई… वो
लोग तुम्हें मारने वाले थे,” मायरा
रोते हुए बोली।
“इसलिए
मुझे जाना पड़ा।”
आरव
की आंखें भर आईं।
“तो
एक बार सच बता
देती…”
मायरा
धीरे से मुस्कुराई।
“अगर
बता देती… तो शायद तुम
मुझे जाने नहीं देते।”
आखिरी
ट्विस्ट
तभी
हवेली की सारी लाइट्स
अचानक जल उठीं।
चारों
तरफ कुछ आदमी बंदूक
लेकर खड़े थे।
उनके
बीच वही businessman खड़ा था।
“बहुत
emotional reunion हो
गया?” वो हंसते हुए
बोला।
आरव
ने मायरा का हाथ कसकर
पकड़ लिया।
“अब
क्या करेंगे?”
मायरा
मुस्कुराई।
“वही…
जो हमेशा साथ करते हैं।”
“क्या?”
“भागेंगे
नहीं… लड़ेंगे।”
तभी
बाहर पुलिस की सायरन गूंज
उठी।
दरअसल…
मायरा
पहले ही secretly पुलिस को location भेज चुकी थी।
कुछ
ही मिनटों में सब criminals गिरफ्तार हो
गए।
नई
शुरुआत
सुबह
होने लगी थी।
बारिश
रुक चुकी थी।
आरव
और मायरा हवेली की छत पर
खड़े सूर्योदय देख रहे थे।
आरव
ने धीरे से पूछा—
“अब
तो कहीं नहीं जाओगी
ना?”
मायरा
मुस्कुराई।
“अगर
जाऊंगी भी… तो तुम्हें
साथ लेकर।”
आरव
हंस पड़ा।
उसने
उसे अपनी बाहों में
भर लिया।
और इस बार…
वो रात उन्हें अलग
नहीं कर पाई। ❤️
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